Rana Pratap History Facts

Some Intresting abt Maha Rana Pratap n Mewar Dynasty
* महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोडा समेत दुश्मन
सैनिको को काट डालते थे

Power of Maharana Pratap
Power of Maharana Pratap

Reference – Bahalol Khan challenged Maharana Pratap 

*जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे भी आ रहे थे तब उन होने उनकी माँ से पूछाकी हिंदुस्तान से क्यों लेकर आपके लिए। …तब माँ का जवाब मिला “उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्टी धूल जहा का राजा अपने प्रजा के पति इतना वफ़ा दार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले आपनी मातृभूमि को चुना ” ….बड किस्मत से उनका वो दौरा रदद्ध हो गया था। “बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में ये बात आप पढ़ सकते है। ..

Maharana Pratap Painting
Maharana Pratap

maharana pratap weapons weight

*महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलो था और
कवच का वजन 80 किलो था और कवच
भाला,कवच,ढाल,और हाथ मे तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो

reference – http://rajputanas.com/rajput-history/facts-about-maharana-pratap/

*आज भी महा राणा प्रताप कि तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रालय में सुरक्षित है

*अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आदा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहट अकबर कि रहेगी

*हल्दी घाटीकी लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिलथे और अकबर कि और से 85000 सैनिक

Maharana Pratap Battle of Haldighati
Maharana Pratap Battle of Haldighati

*राणाप्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना जो आज हल्दी घटी में सुरक्षित है

*महाराणा ने जब महलो का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगो ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फोज के लिए तलवारे बनायीं इसी समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गड़लिया लोहार कहा जाता है नमन है ऐसे लोगो को

Maharana Pratap Painting
Maharana Pratap  life in haldighati

*हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वह जमीनो में तलवारे पायी गयी। … आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 हल्दी घाटी के में मिला

*महाराणा प्रताप अस्त्र शत्र कि शिक्सा जैमल मेड़तिया ने दी थी जो 8000 राजपूतो को लेकर 60000 से लड़े थे। …. उस युद्ध में 48000 मारे गए थे जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे

*राणा प्रताप के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था

Statue of Maha Rana Pratap udaipur
Statue of Maha Rana Pratap udaipur

*राणा का घोडा चेतक भी बहुत ताकत वर था उसके मुह के आगे हाथी कि सूंड लगाई जाती थी

Maharana Pratap and Chetak
Maharana Pratap and Chetak

*मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर कि फोज को आपने तीरो से रोंद डाला था वो राणाप्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा जी बिना भेद भाव के उन के साथ रहते थे आज भी मेवाड़ के राज चिन्ह पैर एक तरह राजपूत है तो दूसरी तरह भील

*राणा का घोडा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिआ पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ।उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वो दरिआ पर कर गया। जहा वो घायल हुआ वहाआज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहा मारा वह मंदिर । हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे

*मरने से पहले महाराणा ने खोया हुआ 85 % मेवार फिर से जीत लिया था

Bravery of Maharana Pratap
Bravery of Maharana Pratap

*सोने चांदी और महलो को छोड़ वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमने

*महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो… और लम्बाई – 7’5” थी…..
दो मियां वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में.

*मेवाड़ राजघराने के वारिस को एक लिंग जी भगवन का दीवान माता जाता है।

*छत्रपति शिवाजी भी मूल रूप से मेवाड़ से तलूक रखते थे वीर शिवा जी के पर दादा उदैपुर महा राणा के छोटे भाई थे

*अकबर को अफगान के शेख रहमुर खान ने कहा था अगर तुम राणा प्रताप और जयमल मेड़तिया को मिला दो अपने साथ तोह तुम्हे विश्व विजेता बन्ने से कोई नहीं रोक सकता पर इन दो वीरो ने जीते जी कबि हार नहीं मानी।

*नेपाल का राज परिवार भी चित्तोर से निकला है दोनों में भाई और खून का रिश्ता है

*मेवाड़ राजघराना आज भी दुनियाका सबसे प्राचीन राजघराना है उस के बाद जापान का है

*rana pratap ke purvaj Rana Sanga ne akabar k dada babar se khanwa me yudh lada tha or rana pratap ne akabar se or rana k bete amar singh ne janghir ko sandhi k liye majboor kiya tha or aapne 15 saalo k raaj me pura Mewar apne kabje me le liye tha

*haldighati se 40 KM dur ranakpur k jungel me aaj bhi rana pratap k senapati rana jhala ki chatri bani huyi hai jaha unhe veer gati prapt huyi hai

Painting of Maharana Pratap
Maharana Pratap  in jungle

*rana prtap k saath afgan k teer chalane wale 2000 pathan bhi the jo ladai shuru hone k 2 ghante baad maidan chod gaye the

*mewar ki or se rana pratap ki ek tukdi ki leadership ek saache musalman ne ki thi usko or uske pariwar ko maharana ne muglo se bachaya tha or mewer me panah di thi

*maharana pratap k bete amar singh ne akabar or muglo ki begumo ko malwa k pass se ek jung jeetne k baad kaid kr laye the …iska pata chalte rana ne un auroto ko samman sahit bhijwaya or 3 din vishit ahiti bana kar rakha is per amar singh ko kaafi samjhaya tha

*maharana prtap k saat mewar malwa or godwar k 100 se jayda thakur saat the

* ek waqt aisa bhi aaya tha jab rana pratap k bete amar chote the or jab wo gass ki roti kha rahe the tab ek billa amar singh k haat se wo gass ki roti le bhaga tha iss per geet bhi jo aaj bhi gaya jata hai “hare gass ki roti jad van bilado le bhagyo”

*aadwasi bheel samaj k log rana k maut k baad bhi unhe ghar ghar pujte rahe in kabilo ka sardar hamesha mewar k ranao ka saath deta aaya hai

*haldi ghati me itna khoon baha tha ki waha k nadiyo or jharno ka pani bhi laal ho gaya tha

or aant me sabi ko shukariya yaha tak padhne k liye
wo rana humare liye lada tha sirf or sirf apne desh k liye na rajput k liye na jat k liye na gurjar k liye na brahman k liye or na hi aapne Raj Sinhasan k liye…..

Jai Maharana….
mar kar bhi jo amar ho gaya wo rana wo maha rana

Post courtesy : Rajput Fashion Club

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Guru Raghavendra Maharana Pratap

 

Raghvendra was Guru /Mentor of Maharana Pratap who taught pratap every aspect of life as well as how to be a Great warrior who not only wins in unconditional situations but to dodge the death by extreme courage .

Raghvendra fought many battles with Maharana pratap against mughals ,etc but when Mewar had to fight with Marwar , Raja Maldeo asked Raghvendra to return an old favour by fighting with their sides , this deliema was very tough for Guru Raghvendra , either fight with his favourite student Rana Pratap or against him.

 

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Maharana pratap history in hindi

महाराणा प्रताप रो परिचै

 

जन्म -9 मई 1540
पिता – महाराणा उदयसिंह
माता – जेवन्तीबाई सोनगरी

Family of Maharana pratap

विमातायां – संध्याबाई सोलंकना, जेवंताबाई मोदडेचो, लालबाई परमार, धारबाई भटयाणी (जगमालजी री मां), गणेशदे चहुवान, वीरबाई झाली, लखांबाई राठोड, कनकबाई महेची,—-खीचण।

Maharana Pratap’s Brothers

Maharana Pratap Painting
Maharana Pratap

भ्राता – शक्तिसिंह, कान्ह, जेतसिंह (जयसिंह), वीरमदेव, रायसिंह (रायमल), जगमाल, सगर, अगर, पंचारण, सीया, सुजाण, लूणकरण, महेशदास, सार्दूल, रूद्रसिंह, (इन्द्रसिंह), नेतसिंह, नगराज, सूरताण, भोजराज, गोपालदास, साहबखान।

Maharana Pratap’s Sisters

बहिनां – हरकुंवरबाई अर 16 अन्य।

Maharana Pratap’s wifes

पत्नियां – अजवांदे परमार (महाराणा अमरसिंह की मां) पुरबाई सोलंकनी, चंपाबाई झाली, जसोदाबाई चहुवान, फूलबाई राठोड, सेमताबाई हाडी आसबाई खीचण, आलमदे चहुवान, अमरबाइ राठोड, लखाबाई राठोड, रतनावती परमार।

Maharana Pratap’s Sons

पुत्र – महाराणा अमरसिंह, सीहो, कचरो, कल्याणदास, सहसो (सहसमल), पुरी (पुरणमल), गोपाल, कल्याणदास, भगवानदास, सावलदास, दुरजणसिंह, चांदो, (चन्द्रसिंह), सुखी (सेखो) हाथी, रायसिंह, मानसिंह, नाथसिंह, रायभाण, जसवन्तसिंह।

Maharana Pratap History in hindi

महाराणा प्रताप उदयपुर मेवाड में शिशोदिया राजवंश रा राजा हा। अे कई साला तक मुगल सम्राट अकबर साथै संघर्ष करियो। इतिहास में इयारो नाम वीरता अर दृढ़ संकळ्प वास्ते प्रचलित है। महाराणा प्रताप रो जनम राजस्थान रे कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह अर महाराणी जीवंत कंवर रे घर में हुयो।

maharana pratap power
maharana pratap power

राणा उदयसिंह रे बाद महाराणा प्रताप मेवाड रा शासक बणिया। एक बार जद अकबर मानसिंह ने आपरो दूत बणा’र महाराणा प्रताप ने अधीनता स्वीकार करणे वास्ते भेज्यो तो महाराणा प्रताप इण प्रस्ताव ने ठुकरा दियो। बाद में वां ने कई संकटा सु गुजरणो पडियो, पण बे अकबर सु संधि नीं करी। वां मानसिंह साथे भोजन ना कर आपरे स्वाभिमान रो परिचै दियो और इणरो परिणाम 1576 रो हल्दीघाटी रो युद्ध हुयो।

Maharana-Pratap spear
Maharana-Pratap spear

इण युद्ध में राणा प्रताप और मानसिंह रो मुकाबलो हुयो। 1576 रे हल्दीघाटी रे युद्ध में महाराणा प्रताप 20,000 राजपूता ने लेर मानसिंह री 80,000 री सेना रो सामनो करियो। इण युद्ध में महाराणा प्रताप रो प्रिय घोडो चेतक मानसिंह रे हाथी रे माथे पर आपरा पैर जमा दिया और महाराणा प्रताप आपरै भाले सूं विण पर वार करियो पण मानसिंह हौद में जा’र छिप ग्यो और बच निकळियो। चेतक री टांग टूटणे सु थोडी दूरी पर ही विणरी मौत हुयगी, आ लडाई कई दिनां तक चाली। अंत में मानसिंह बिना जीतया वापस लौट ग्यो। राणा मुगला ने बहोत छकाया, जिके रे कारण वे मेवाड सु भाग निकळिया। इणरे बाद राणा ने दिकता उठाणी पडी पण वियारा मंत्री भामाशाह आपरी निजी सम्पत्ती दे’र राणा री सेना तैयार करणे में मदद करी। इण सेना रे सहयोग सूं मेवाड री खोई भूमि अकबर सूं पाछी मिलगी। फेर भी चित्तौड अर मांडलगढ बिणरे हाथ में नीं आ सकिया। विण री राजधानी चांवड नामक कस्बे में ही, जठे 1597 में महाराणा प्रताप री मौत हुई और जठे वियारे स्मारक रे रूप में एक छतरी आज भी बणियोडी है।

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Hindi Poem on Maharana Pratap

One poem on warrior King Maharana Pratap , Do Share if you like it ..

चढ़ चेतक पर तलवार उठारखता था भूतल–पानी को।
राणा प्रताप सिर काट–काटकरता था सफल जवानी को।।

कलकल बहती थी रण–गंगाअरि–दल को डूब नहाने को।

Rana pratap and chetak
Rana pratap and chetak

तलवार वीर की नाव बनीचटपट उस पार लगाने को।।

वैरी–दल को ललकार गिरी¸वह नागिन–सी फुफकार गिरी।
था शोर मौत से बचो¸बचो¸तलवार गिरी¸ तलवार गिरी।।

पैदल से हय–दल गज–दल मेंछिप–छप करती वह विकल गई!
क्षण कहां गई कुछ¸ पता न फिर¸देखो चमचम वह निकल गई।।

क्षण इधर गई¸ क्षण उधर गई¸क्षण चढ़ी बाढ़–सी उतर गई।
था प्रलय¸ चमकती जिधर गई¸क्षण शोर हो गया किधर गई।
क्या अजब विषैली नागिन थी¸जिसके डसने में लहर नहीं!
उतरी तन से मिट गये वीर¸फैला शरीर में जहर नहीं।।

थी छुरी कहीं¸ तलवार कहीं¸वह बरछी–असि खरधार कहीं।
वह आग कहीं अंगार कहीं¸बिजली थी कहीं कटार कहीं।।

लहराती थी सिर काट–काट¸बल खाती थी भू पाट–पाट।
बिखराती अवयव बाट–बाटतनती थी लोहू चाट–चाट।!
सेना–नायक राणा के भीरण देख–देखकर चाह भरे।
मेवाड़–सिपाही लड़ते थेदूने–तिगुने उत्साह भरे।।

क्षण मार दिया कर कोड़े सेरण किया उतर कर घोड़े से।
राणा रण–कौशल दिखा दियाचढ़ गया उतर कर घोड़े से।।

क्षण भीषण हलचल मचा–मचाराणा–कर की तलवार बढ़ी।
था शोर रक्त पीने को यहरण–चण्डी जीभ पसार बढ़ी।।

वह हाथी–दल पर टूट पड़ा¸मानो उस पर पवि छूट पड़ा।
कट गई वेग से भू¸ ऐसाशोणित का नाला फूट पड़ा।।

जो साहस कर बढ़ता उसकोकेवल कटाक्ष से टोक दिया।
जो वीर बना नभ–बीच फेंक¸बरछे पर उसको रोक दिया।।

क्षण उछल गया अरि घोड़े पर¸क्षण लड़ा सो गया घोड़े पर।
वैरी–दल से लड़ते–लड़तेक्षण खड़ा हो गया घोड़े पर।।

क्षण भर में गिरते रूण्डों सेमदमस्त गजों के झुण्डों से¸
घोड़ों से विकल वितुण्डों से¸
पट गई भूमि नर–मुण्डों से।।

ऐसा रण राणा करता थापर उसको था संतोष नहींक्षण–क्षण आगे बढ़ता था वहपर कम होता था रोष नहीं।।

कहता था लड़ता मान कहांमैं कर लूं रक्त–स्नान कहां।
जिस पर तय विजय हमारी हैवह मुगलों का अभिमान कहां।।

भाला कहता था मान कहां¸घोड़ा कहता था मान कहां?
राणा की लोहित आंखों सेरव निकल रहा था मान कहां।।

लड़ता अकबर सुल्तान कहां¸वह कुल–कलंक है मान कहां?

राणा कहता था बार–बारमैं करूं शत्रु–बलिदान कहां?।।

तब तक प्रताप ने देख लिया,लड़ रहा मान था हाथी पर।
अकबर का चंचल साभिमानउड़ता निशान था हाथी पर।।

वह विजय–मन्त्र था पढ़ा रहा¸अपने दल को था बढ़ा रहा।
वह भीषण समर–भवानी कोपग–पग पर बलि था चढ़ा रहा।।

फिर रक्त देह का उबल उठाजल उठा क्रोध की ज्वाला से।
घोड़े से कहा बढ़ो आगे¸बढ़ चलो कहा निज भाला से।।

हय–नस नस में बिजली दौड़ी¸राणा का घोड़ा लहर उठा।
शत–शत बिजली की आग लिए,वह प्रलय–मेघ–सा घहर उठा।।

क्षय अमिट रोग¸ वह राजरोग¸ज्वर सन्निपात लकवा था वह।
था शोर बचो घोड़ा–रण सेकहता हय कौन¸ हवा था वह।।

तनकर भाला भी बोल उठा,राणा मुझको विश्राम न दे।
बैरी का मुझसे हृदय गोभ,तू मुझे तनिक आराम न दे।।

pratap in battle of haldighati
pratap in battle of haldighati

खाकर अरि–मस्तक जीने दे¸बैरी–उर–माला सीने दे।
मुझको शोणित की प्यास लगीबढ़ने दे¸ शोणित पीने दे।।

मुरदों का ढेर लगा दूं मैं¸अरि–सिंहासन थहरा दूं मैं।
राणा मुझको आज्ञा दे देशोणित सागर लहरा दूं मैं।।

रंचक राणा ने देर न की¸घोड़ा बढ़ आया हाथी पर।
वैरी–दल का सिर काट–काटराणा चढ़ आया हाथी पर।।

गिरि की चोटी पर चढ़करकिरणों निहारती लाशें¸
जिनमें कुछ तो मुरदे थे¸
कुछ की चलती थी सांसें।।

वे देख–देख कर उनकोमुरझाती जाती पल–पल।
होता था स्वर्णिम नभ परपक्षी–क्रन्दन का कल–कल।।

मुख छिपा लिया सूरज नेजब रोक न सका रूलाई।
सावन की अन्धी रजनीवारिद–मिस रोती आई।।

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Rana pratap and Jalal Akbar History

जब अकबर लाखों सेना और करोडों रुपया खर्च करके महाराणा प्रताप को न पकड़ सका ,तो उसने अपमान करने के लिए प्रताप का चित्र पाखाने पर लगवा दिया ,जिससे आने जाने वाले उसे देखें और उनका खूब अपमान हो .

pratap in battle of haldighati
pratap in battle of haldighati

अकस्मात् उधर से बीरबल निकले . उन्होंने जब यह देखा तो उन्हें बड़ा क्रोध आया ,क्योंकि वह महाराणा प्रताप पर बड़ी श्रद्धा रखते थे . उन्होंने लौटकर तुरंत ही बादशाह से पूछा – जहाँपनाह ! ऐसा मालूम होता है कि आपको कब्ज की शिकायत है .”
बादशाह ने पूछा – क्यों ? नहीं तो .
बीरबल ने उत्तर दिया – आपने जो महाराणा प्रताप का चित्र अपने पाखाने पर लगवा दिया है ,उससे यह मालूम पड़ता है कि आपको कब्ज की शिकायत है ,क्योंकि जब आप प्रताप के चित्र को देखते होंगे तब अवश्य ही आपको पाखाने की हाजत हो उठती होगी . इसीलिए आपने उनका चित्र पाखाने पर लगाया है .
यह सुनकर बादशाह को काफी क्रोध आया और लज्जा भी . उन्होंने उसी समय महाराणा प्रताप जी का चित्र पाखाने से हटवा लिया ….

नमन ऐसे वीर और ”बुलंद संस्कार” वाले महाराणा जी को…!

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