Rajput gaurav Hindi poem
राजपूत होने का गौरव,
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राजपूत होने का गौरव,
बडे जतन से पाया,
ये महा तपोँ की छाया,
मातृभूमी की रक्षा का,
सतयुग से भार उठाए,
तुमने भारत की सेवा मे,
मुँडो के माल चढाए.
तुम्ही ने बनकर भीष्म,
सदा काँटो को हृदय से लगाया,
महा पुण्य का फल…
तुम्ही राणा बनकर गरजे ,
मुगलो पर बिजली बन बरसे ,
तुम्ही ने हल्दिघाटी मे ,
बलिदान किए हसते हसते,
तुमने अपने भुज बल से कितने,
वीरो का होश उडाया,
महा पुण्य का फल…
है शान हमारी सदा ईसी मे,
पथ पर चलते जाए,
अपने विश्वास बुद्दि बल से,
दुनिया को राह दिखाए,
तुम राजपूत के वंशज हो,
जो सदा विजय घर लाए
महापुण्य का फल
:-धर्मेँद्र सिँहजी तोमर
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Comments
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December 15th, 2012 on 2:09 pm
Jai mata ji ki
December 15th, 2012 on 2:11 pm
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