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Tag: Maharana Pratap biography in hindi

Dec
03

Maharana pratap history in hindi

by , under Maharana pratap

महाराणा प्रताप रो परिचै

 

जन्म -9 मई 1540
पिता – महाराणा उदयसिंह
माता – जेवन्तीबाई सोनगरी

Family of Maharana pratap

विमातायां – संध्याबाई सोलंकना, जेवंताबाई मोदडेचो, लालबाई परमार, धारबाई भटयाणी (जगमालजी री मां), गणेशदे चहुवान, वीरबाई झाली, लखांबाई राठोड, कनकबाई महेची,—-खीचण।

Maharana Pratap’s Brothers

Maharana Pratap Painting

Maharana Pratap

भ्राता – शक्तिसिंह, कान्ह, जेतसिंह (जयसिंह), वीरमदेव, रायसिंह (रायमल), जगमाल, सगर, अगर, पंचारण, सीया, सुजाण, लूणकरण, महेशदास, सार्दूल, रूद्रसिंह, (इन्द्रसिंह), नेतसिंह, नगराज, सूरताण, भोजराज, गोपालदास, साहबखान।

Maharana Pratap’s Sisters

बहिनां – हरकुंवरबाई अर 16 अन्य।

Maharana Pratap’s wifes

पत्नियां – अजवांदे परमार (महाराणा अमरसिंह की मां) पुरबाई सोलंकनी, चंपाबाई झाली, जसोदाबाई चहुवान, फूलबाई राठोड, सेमताबाई हाडी आसबाई खीचण, आलमदे चहुवान, अमरबाइ राठोड, लखाबाई राठोड, रतनावती परमार।

Maharana Pratap’s Sons

पुत्र – महाराणा अमरसिंह, सीहो, कचरो, कल्याणदास, सहसो (सहसमल), पुरी (पुरणमल), गोपाल, कल्याणदास, भगवानदास, सावलदास, दुरजणसिंह, चांदो, (चन्द्रसिंह), सुखी (सेखो) हाथी, रायसिंह, मानसिंह, नाथसिंह, रायभाण, जसवन्तसिंह।

Maharana Pratap History in hindi

महाराणा प्रताप उदयपुर मेवाड में शिशोदिया राजवंश रा राजा हा। अे कई साला तक मुगल सम्राट अकबर साथै संघर्ष करियो। इतिहास में इयारो नाम वीरता अर दृढ़ संकळ्प वास्ते प्रचलित है। महाराणा प्रताप रो जनम राजस्थान रे कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह अर महाराणी जीवंत कंवर रे घर में हुयो।

maharana pratap power

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राणा उदयसिंह रे बाद महाराणा प्रताप मेवाड रा शासक बणिया। एक बार जद अकबर मानसिंह ने आपरो दूत बणा’र महाराणा प्रताप ने अधीनता स्वीकार करणे वास्ते भेज्यो तो महाराणा प्रताप इण प्रस्ताव ने ठुकरा दियो। बाद में वां ने कई संकटा सु गुजरणो पडियो, पण बे अकबर सु संधि नीं करी। वां मानसिंह साथे भोजन ना कर आपरे स्वाभिमान रो परिचै दियो और इणरो परिणाम 1576 रो हल्दीघाटी रो युद्ध हुयो।

Maharana-Pratap spear

Maharana-Pratap spear

इण युद्ध में राणा प्रताप और मानसिंह रो मुकाबलो हुयो। 1576 रे हल्दीघाटी रे युद्ध में महाराणा प्रताप 20,000 राजपूता ने लेर मानसिंह री 80,000 री सेना रो सामनो करियो। इण युद्ध में महाराणा प्रताप रो प्रिय घोडो चेतक मानसिंह रे हाथी रे माथे पर आपरा पैर जमा दिया और महाराणा प्रताप आपरै भाले सूं विण पर वार करियो पण मानसिंह हौद में जा’र छिप ग्यो और बच निकळियो। चेतक री टांग टूटणे सु थोडी दूरी पर ही विणरी मौत हुयगी, आ लडाई कई दिनां तक चाली। अंत में मानसिंह बिना जीतया वापस लौट ग्यो। राणा मुगला ने बहोत छकाया, जिके रे कारण वे मेवाड सु भाग निकळिया। इणरे बाद राणा ने दिकता उठाणी पडी पण वियारा मंत्री भामाशाह आपरी निजी सम्पत्ती दे’र राणा री सेना तैयार करणे में मदद करी। इण सेना रे सहयोग सूं मेवाड री खोई भूमि अकबर सूं पाछी मिलगी। फेर भी चित्तौड अर मांडलगढ बिणरे हाथ में नीं आ सकिया। विण री राजधानी चांवड नामक कस्बे में ही, जठे 1597 में महाराणा प्रताप री मौत हुई और जठे वियारे स्मारक रे रूप में एक छतरी आज भी बणियोडी है।

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Jul
27

Maharana pratap story in hindi

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पढ़िए स्टूडेन्ट्स क्यासीखते है प्रताप
के व्यक्तित्व से..

Maharana Pratap Painting

Maharana Pratap

1. प्रताप की कद काठी असामान्य थी। जंगलों, बीहड़ों में दिन
रात दौडऩे पर नहीं थके। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यूथ को अपने
शारीरिक विकास की तरफ ध्यान देना होगा। स्वस्थ तन
रहेगा तो मन भी स्वस्थ रहेगा। शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले
खाद्य पदार्थों से बचें। प्रताप ने अपने शरीर
को जंगलों बीहड़ों में काफी थकाया, तभी वे सुडौलथे। युवाओं
को भी चाहिए कि वे नियमितव्यायाम से शरीर को स्वस्थ ओर
तंदुरूस्त रखने का प्रयास करें।

Weapons of Rana Pratap
2. प्रताप के अस्त्र विशेष रूप से भाला।
इतना भारी था कि आजउसे आसानी से उठा नहीं सकते। वे एक
हाथ से चलाते थे। शरीर, व्यक्ति का सबसे बड़ा सेवक है। जैसे
काम में लेंगे वैसे काम करेगा। प्रताप के अस्त्र भारी थे, लेकिन
उनके शरीर का संचालन दिमाग की गहराइयों से होता। मन में
जीत का जज्बा शामिल होने से सब हल्का हो जाता है। यूथ
को भी चाहिए कि वे अपने भीतर की शक्ति और उसके इस्तेमाल
की विधि को खोजें।

Maharana Pratap Horse Chetak 
3. चेतक की वफादारी। जख्मी होकर भी प्रताप की जान
बचाई। चेतक की वफादारी और प्रताप की संचालन शक्ति से
हमें सीखना होगा। जीवन के किसी क्षेत्र में साख बनाए रखने
के लिए संचालन शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की भावनाबेहद
आवश्यक है। युवाओं को विशेष रूप से इन दोनों गुणों को अपने
जीवन में उतारना होगा। जो उनके कॅरियर में भी काफी हद तक
सहायक होंगे।
4. जंगल में रहे, घास की रोटी खाई, लेकिन प्रताप ने
स्वाभिमान नहीं खोया। युवाओं को प्रताप के इस जुझारूपन से
सीख लेनी चाहिए कि उन्होंने अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए
सारी सुख सुविधाओं का त्याग किया। एक तरह से यहप्रताप
का रिर्सोस मैनेजमेंट था। पर्याप्त संसाधन नहीं होने पर
भी अपने लक्ष्य की पूर्ति करना। घास की रोटी खाना एक
उदाहरण है। प्रताप का रिर्सोस मैनेजमेंट काफीप्रभावी था।

Ally of Rana Pratap 
5. सांप्रदायिक एकता। भामाशाह, राणा पूंजा और हकीम
खां का मिला था साथ। जब हम किसी लक्ष्य को प्राप्त
करना चाहते हैं तो उसमें सहयोग लेना और देना स्वाभाविक है।
लीडर एक होता है, लेकिन उसके पीछे पूरी टीम होती है। टीम में
योग्य पहले और उसके बाद कमजोर होते हैं, लेकिन वोटीम
ही कहलाती है। किसी को कमजोर होने के कारण टीम से बाहर
नहीं किया जा सकता है।

!! जय जय राजपुताना !!
!! जय महाराणा हुकुम की !!

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Feb
02

Maharana Pratap History in Hindi

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Maharana Pratap Painting

Maharana Pratap

Books to Prefer -

Maharana Pratap was indeed great Hindu warrior , who all alone fought against Mughal Emporror for his nation , Akbar won every man and Territory , except of Maharana Pratap.

Maharana was Great King , he been ahead from Akbar all his life as he regained all forts which he tried and common people loved him for his works . Maharana Pratap was so great that his horse “Chetak” is also remembered .

Maharana Pratap History in Hindi by Nanda Kumar Dev Sharma 

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जीवनी । इसे पंडित नन्द कुमार देव शर्मा ने १९२३ में लिखा था ।

महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायकऔर वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया है।
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे कालखण्ड में पैदा हुए थे, जब मुगलों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुगल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य शैली के कारण ‘महान’ कहा जा सकता है।
लेकिन महाराणा प्रताप उसकी ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी आकांक्षा के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। परिणामस्वरूप अकबर उसके विरुद्ध युद्ध में उतरा। इस प्रक्रिया में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया है।

Maharana Pratap Biography in Hindi

 

महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण केलिये अमर है। हन्होंने कई वर्षों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। इनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर के घर हुआ था। १५७६ के हल्दीघाटी युद्ध में २०,००० राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के ८०,००० की सेना का सामना किया। शत्रुसेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को शक्ति सिंह ने बचाया। उनके प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई। यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें १७,००० लोग मारे गएँ। मेवाड़ को जीतने के लिये अकबर ने सभी प्रयासकिये। महाराणा की हालत दिन-प्रतिदिनचिंतीत हुइ। २५,००० राजपूतों को १२ साल तक चले उतना अनुदान देकर भामाशाह भी अमर हुआ।

लोक में रहेंगे परलोक हु ल्हेंगे तोहू,
पत्ता भूली हेंगे कहा चेतक की चाकरी ||
में तो अधीन सब भांति सो तुम्हारे सदा एकलिंग,
तापे कहा फेर जयमत हवे नागारो दे ||
करनो तू चाहे कछु और नुकसान कर ,
धर्मराज ! मेरे घर एतो मतधारो दे ||
दीन होई बोलत हूँ पीछो जीयदान देहूं ,
करुना निधान नाथ ! अबके तो टारो दे ||
बार बार कहत प्रताप मेरे चेतक को ,
एरे करतार ! एक बार तो उधारो||

”जय राजपूत जय राजपूताना”
|| जय श्री राजपुताना||

Rajputs Amar Rahe , Har Har Mahadev.

 

Jai Maharana Pratap

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